अभी तक आप सिर्फ मजे ले रहे थे क्योंकि ये तो पुरानी कहावत है कि दो की लड़ाई में तीसरा सिर्फ मुंह पर उंगली रखकर देखने का काम करता और यकीन मानिए करोड़ों लोगों का कहना भी यही है? ईरान इजरायल युद्ध का असर अब आपकी रसोई में भी पड़ना शुरू हो गया।लेकिन सरकार में पेट्रोलियम मंत्री आज भी अपने ट्वीट से सब सही होने का दिलासा भारत की जनता को दे रहे है हालांकि वह अपनी कुर्सी के प्रति उनकी ईमानदारी है लेकिन यह ईमानदारी जनता को भ्रमित और भी ज्यादा परेशान कर करती है पता नहीं सरकार कब मानेगी कि हां एलपीजी गैस सिलेंडर की कमी होने लगी है !अगर नहीं हो रही तो घरेलू सिलेंडर 60 रुपए और कमर्शियल सिलेंडर 115 रुपए बढ़ाने के तुरंत अगले दिन आपने एलपीजी सिलेंडर के लिए समय सीमा क्यों तय कर दी। यह सब सवाल हर एक बड़े होटल का व्यवसाय करने वाले व्यावसायिक व्यक्ति के मन में जरूर घूम रहा होगा,क्योंकि उन्हीं के ऊपर गंभीर संकट पड़ रहा है। तो अब बताते है कि ईरान और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध से भारत पर एलपीजी गैस का असर क...
Story दिल्ली की सड़कों पर बैट और अपनी क्रिकेट किट के साथ नजर आने वाला युवक टूट सा गया था लेकिन उसने अपने सपनों को देखना नहीं बंद किया,उसके भारी क्रिकेट कीट से ज्यादा उसे उन तानों से भारीपन लगने लगा था जो दिल्ली की सड़कों पर उसे व उसके पिता को मिलते थे।उसके पिता के लिए अब ये सब झेल पाना मुश्किल था पिता ने पुलिस की नौकरी छोड़ दी और पलायन कर गए केरला।आज आपको एक ऐसे हिटर बैट्समैन की वो भावुकता से भरी स्टोरी सुनाऊंगा जो उन लोगों के लिए है जो सपने देखना बंद कर देते है। यह स्टोरी 1994 में जन्मे संजू सैमसन की है जो आज भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा है।जिनके लाइफ में कई बार दुखो का पहाड़ टूट पड़ा ये पहाड़ प्राकृतिक नहीं थे ये पहाड़ उनके सपनों को बार बार बिखरने वाले थे यह कष्ट उनके द्वारा देखे गए सपने को टूटने के थे।अब आप ही सोचिए जिसके पिता पुत्र दोनों ने तानों से जिंदगी की शुरुआत की हो वह क्या ही करेगा।दिल्ली में पुलिस की नौकरी करने वाला पिता अपने बेटे के सपनों को पूरा करने के लिए क्या क्या नहीं सुना यहां तक...
अमरावती भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी), अमरावती के विद्यार्थियों ने बीते 6 फरवरी को तपोवन स्थित तपोवन महारोगी सेवा मंडल का एक विशेष शैक्षणिक दौरा किया, जो उनके लिए केवल एक क्षेत्र भ्रमण न रहकर जीवन और पत्रकारिता के वास्तविक सरोकारों को समझने का एक गहरा अनुभव बन गया। शहर की भागदौड़ से दूर, लगभग 388 एकड़ में फैला यह परिसर अपनी हरियाली और शांति के साथ मानवीय जिजीविषा की एक अनूठी कहानी कहता है। जैसे ही विद्यार्थी इस विशाल परिसर में दाखिल हुए, उन्हें वहां की कार्यशालाओं से आती श्रम की थाप और लोगों के बीच आपसी सहयोग का एक ऐसा वातावरण मिला जो किसी सामान्य अस्पताल या संस्था में देखने को नहीं मिलता। यह वह स्थान है जहाँ समाज द्वारा उपेक्षित और तिरस्कृत किए गए लोगों को न केवल चिकित्सा सुविधा दी जाती है, बल्कि उन्हें एक गरिमामय और आत्मनिर्भर जीवन जीने का मार्ग भी दिखाया जाता है। विद्यार्थियों के लिए यह दौरा किताबी ज्ञान से परे समाज की उस कड़वी और संवेदनशील सच्चाई से रूबरू होने का माध्यम बना, जिसे अक्सर मुख्यधारा का मीडिया हाशिए प...
Comments