पीठ पर क्रिकेट कीट और दिल्ली की सड़कों पर तानों का बोझ,इन हालातों से गुजरकर कैसे वर्ल्ड कप तक पहुंचा ये क्रिकेटर

Story 
         दिल्ली की सड़कों पर बैट और अपनी क्रिकेट किट के साथ नजर आने वाला युवक टूट सा गया था लेकिन उसने अपने सपनों को देखना नहीं बंद किया,उसके भारी क्रिकेट कीट से ज्यादा उसे उन तानों से भारीपन लगने लगा था जो दिल्ली की सड़कों पर  उसे व उसके पिता को मिलते थे।उसके पिता के लिए अब ये सब झेल पाना मुश्किल था पिता ने पुलिस की नौकरी छोड़ दी और पलायन कर गए केरला।आज आपको एक ऐसे हिटर बैट्समैन की वो भावुकता से भरी स्टोरी सुनाऊंगा जो उन लोगों के लिए है जो सपने देखना बंद कर देते है।
    यह स्टोरी 1994 में जन्मे संजू सैमसन की है जो आज भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा है।जिनके लाइफ में कई बार दुखो का पहाड़ टूट पड़ा ये पहाड़ प्राकृतिक नहीं थे ये पहाड़ उनके सपनों को बार बार बिखरने वाले थे  यह कष्ट उनके द्वारा देखे गए सपने को टूटने के थे।अब आप ही सोचिए जिसके पिता पुत्र दोनों ने तानों से जिंदगी की शुरुआत की हो वह क्या ही करेगा।दिल्ली में पुलिस की नौकरी करने वाला पिता अपने बेटे के सपनों को पूरा करने के लिए क्या क्या नहीं सुना यहां तक कि नौकरी छोड़ दी।हालांकि ये कोई नई बात नहीं है हर पिता की एक ख्वाइश होती है कि उसका बेटा दुनिया में नाम रोशन करे। दिल्ली पुलिस की नौकरी छोड़कर संजू के पिता केरला शिफ्ट हो गए ताकि उनका बेटा इंडिया टीम के लिए खेले, लेकिन उन्हें क्या पता था कि असली लड़ाई मैदान के अंदर नहीं, बल्कि बाहर होने वाली है। 10 साल की उम्र में ही संजू को अंडर 13 में नहीं लिया गया।उसके बाद भी कई दिनों तक वह केवल प्रैक्टिस ही करते रहे।18 साल की उम्र में जब संजू ने IPL में एंट्री मारी, तो दुनिया ने कहा कि ये अगला सचिन या कोहली बनेगा, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। 2015 में सिर्फ एक मैच खेला और फिर 5 साल के लिए टीम से बाहर हो गए। धोनी, पंत, राहुल सब आए, लेकिन हर बार संजू को लिस्ट से बाहर रखा गया। लोग 'जस्टिस फॉर संजू' चिल्लाते रहे, लेकिन सेलेक्शन के दरवाजे हमेशा बंद मिले।हद तो तब हो गई जब इस साल भी उन्हें मौका नहीं मिल रहा था। जब कैप्टन सूर्या से पूछा गया कि संजू को खिलाइए, तब उनका जवाब आया अभिषेक की जगह खिलाऊं? या तिलक की जगह __एक 18 साल के लड़के को दुनिया को खुद को साबित करने में 14 साल लग गए। लेकिन संजू हमें एक बात सिखा रहे है अगर दुनिया आपका रास्ता रोके तो लड़ना नहीं, 
बल्कि खामोशी से इतनी मेहनत करना कि आपका वक्त ही सबका मुंह बंद कर दे।हालांकि ये लाइनें किसी भी किताबों की लाइन होगी लेकिन संजू के लिए ये सटीक बैठती है।


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