आजादी के बाद से एक सड़क की दरकार
सरकार भले ही गांवों में विकास के लाख दावे कर रही हो, लेकिन हर बार बारिश में टापू बन जाने वाले क्षेत्र के सुखलिया मजरे पुरासी गांव के ग्रामीणों को आवागमन के लिए आजादी के बाद से ही एक अदद सड़क की दरकार है। सड़क की मांग पर प्रशासनिक अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों के आश्वासन की घुट्टी पीकर थक चुके दो ग्रामीण मंगलवार की सुबह हाथों में तिरंगा झंडा लिए पैदल ही प्रदेश की राजधानी लखनऊ मुख्यमंत्री से मुलाकात करने निकले हैं।
बताते चलें कि सुखलिया मजरे पुरासी गांव आजादी के बाद से ही एक अदद मार्ग के लिए आज भी तरस रहा है। जबकि काफी अर्से से बारिश के दिनों में जलभराव के कारण गांव टापू बन जाता है। ग्रामीणों के आवागमन के लिए प्रशासन को प्रत्येक वर्ष बारिश में नाव की व्यवस्था करनी पड़ती है। यही नहीं जनप्रतिनिधियों,शासन व प्रशासन के लोग बारिश में टापू बने गांव का दौरा करते हैं और ग्रामीणों को सड़क मुहैय्या कराने का आश्वासन भी देते हैं। लेकिन आज तक गांव में आवागमन के लिए एक अदद सड़क का निर्माण नहीं हो सका। ग्रामीणों ने इस बार हुए विधानसभा चुनाव के पूर्व सड़क नहीं तो वोट नहीं का नारा देकर धरना प्रदर्शन किया था लेकिन प्रशासनिक नुमाइंदों ने एक बार फिर आश्वासन की घुट्टी पिला ग्रामीणों को शांत कर दिया। जबकि ग्रामीणों ने सड़क के लिए एसडीएम, डीएम, विधायक व सांसद तक गुहार लगा चुके हैं। लेकिन गांव को सड़क नहीं मिली। आखिर में गांव के ग्रामीण रंजीत सिंह व राम मनोहर ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर गांव की समस्या से अवगत कराने के लिए मंगलवार की सुबह प्रदेश की राजधानी लखनऊ के लिए पैदल ही कूंच कर दिया। ग्रामीण रंजीत सिंह ने बताया कि गांव में आवागमन के लिए सड़क न होने से बच्चों की शिक्षा व विकास तो प्रभावित हुआ ही है। साथ ही गांव के युवक व युवतियों के साथ कोई भी शादी ब्याह नहीं करना पसंद कर रहा। उन्होंने बताया कि इन्ही समस्याओं को देखते हुए मुख्यमंत्री जी से मुलाकात कर गांव की समस्या से अवगत कराउंगा और गांव में आवागमन के लिए सड़क की मांग करुंगा।
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